✍️परिचय
भगत सिंह आज़ादी, साहस और विचारों की स्वतंत्रता का प्रतीक हैं। उन्होंने सिर्फ अंग्रेज़ी हुकूमत को नहीं, बल्कि समाज में मौजूद अंधविश्वासों और रूढ़ियों को भी चुनौती दी। जेल में उन्होंने “Why I Am an Atheist” नाम का प्रसिद्ध निबंध लिखा। यह निबंध सिर्फ नास्तिकता पर आधारित नहीं है, बल्कि सोच, तर्क और इंसान की जिम्मेदारी को समझाने वाला है। इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि भगत सिंह ने यह निबंध क्यों लिखा, उनकी सोच क्या थी और आज के समय में इससे हमें क्या सीख मिलती है।
📖 किताब की पृष्ठभूमि
“Why I Am an Atheist” 1930 में लिखा गया था, जब भगत सिंह लाहौर जेल में थे। उनके कुछ साथी कहते थे कि वे ईश्वर में विश्वास नहीं करते क्योंकि उनमें अहंकार है। इसी बात का उत्तर देने के लिए उन्होंने यह निबंध लिखा।उन्होंने बताया कि उनका नास्तिक होना किसी घमंड का परिणाम नहीं, बल्कि गहरी समझ और सोच का नतीजा है। उन्होंने अपने जीवन के अनुभव और विज्ञान की समझ को आधार बनाया।
उनका कहना था: “I deny the existence of God. It’s not because I am arrogant, but because I have reasons to believe that man creates his own destiny.”
💬 भगत सिंह की सोच और तर्क
भगत सिंह के अनुसार, नास्तिकता धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि तर्क, विज्ञान और मानवता के पक्ष में है। उनका मानना था कि अगर इंसान हर समस्या के लिए ईश्वर पर निर्भर रहेगा, तो वह अपनी असली क्षमता को पहचान नहीं पाएगा।उन्होंने सवाल उठाया कि यदि ईश्वर है, तो दुनिया में अन्याय, गरीबी और शोषण क्यों है?
उनकी नजर में प्रगति केवल विज्ञान, तर्क और स्वतंत्र सोच से ही संभव है।
उनका नास्तिक होना नैतिकता का त्याग नहीं था। वे मानते थे कि असली नैतिकता इंसानियत से आती है, न कि डर या Blind faith से।
🌿 आज के समय में इस विचार की प्रासंगिकता
आज भी समाज में अंधविश्वास, कट्टरता और रूढ़ियाँ मौजूद हैं। ऐसे समय में भगत सिंह का यह निबंध बेहद महत्वपूर्ण लगता है।वे युवाओं को संदेश देते हैं कि सोचना, सवाल करना और तर्क करना इंसान की सबसे बड़ी ताकत है।
उनकी सोच आज के समय में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और मानसिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देती है।
अगर समाज तर्क से सोचना शुरू कर दे, तो बदलाव अपने आप आने लगता है।
❤️ My View
“Why I Am an Atheist” सिर्फ नास्तिकता की बात नहीं है। यह इंसान की क्षमता, साहस और स्वतंत्र सोच का संदेश है।भगत सिंह का ईश्वर में अविश्वास इंसान पर विश्वास था — कि हर व्यक्ति अपनी किस्मत खुद बनाता है।
उनकी सोच हमें प्रेरित करती है कि हम अपने कर्म, तर्क और साहस पर भरोसा करें।
💭 आपकी क्या राय है?
क्या बिना ईश्वर में विश्वास किए भी इंसान नैतिक और अच्छा हो सकता है?अपनी राय कॉमेंट में लिखें।

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