बिना पैसे लगाए सोशल मीडिया से सीखने की सही शुरुआत कैसे करें

सोशल मीडिया से सीखना

एक बात साफ कर लेते हैं। सीखने के लिए पैसे जरूरी नहीं हैं। जरूरी है सही नजर और थोड़ी समझ। मैने खुद भी सोशल मीडिया से ही ये सब सिखा है। सोशल मीडिया आज सिर्फ टाइम पास का जरिया नहीं है। अगर आप चाहें तो यही प्लेटफॉर्म आपकी क्लासरूम बन सकता है। फर्क बस इतना है कि यहां कोई सिलेबस नहीं देता। आपको खुद तय करना पड़ता है कि क्या सीखना है और किससे सीखना है। यहीं से असली खेल शुरू होता है। सबसे पहले ये समझना जरूरी है सोशल मीडिया पर हर कोई टीचर नहीं होता। और जो सबसे ज्यादा बोलता है, वही सबसे ज्यादा जानता है, ये भी जरूरी नहीं। यहां दो तरह के लोग होते हैं। एक जो दिखावे के लिए कंटेंट बनाते हैं। दूसरे जो सच में कुछ जानते हैं और बांटते हैं। आपको दूसरे वाले ढूंढने हैं।

बिना पैसे लगाए सोशल मीडिया से सीखने की सही शुरुआत कैसे करें

सीखने से पहले खुद से एक सवाल पूछिए

आप क्या सीखना चाहते हैं?

  • डिजिटल मार्केटिंग
  • कंटेंट राइटिंग
  • वीडियो एडिटिंग
  • फ्रीलांसिंग
  • कोडिंग
  • स्टॉक मार्केट
  • सरकारी योजनाओं की जानकारी
  • या बस बेहतर सोच और डिसिप्लिन

जब तक ये साफ नहीं होगा, सोशल मीडिया आपको सिखाएगा नहीं। उल्टा भटका देगा। यहां की सबसे बड़ी दिक्कत यही है। सब कुछ एक साथ दिखता है। दिमाग थक जाता है। तो पहला नियम यही है। एक समय में एक स्किल।

प्लेटफॉर्म समझिए, सब एक जैसे नहीं होते

हर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का काम अलग है।

YouTube

यह सबसे मजबूत जगह है सीखने के लिए।

लंबा कंटेंट। समझाने का टाइम। अगर कोई चीज गहराई से सीखनी है, तो यहीं आइए। लेकिन ध्यान रखें। पहले वीडियो मत खोलिए। पहले चैनल देखिए। जिस चैनल पर फालतू थंबनेल, बहुत ज्यादा वादे और हर वीडियो में मोटिवेशन ज्यादा, जानकारी कम हो वहां समय बर्बाद होगा।

Instagram

यहां सीखना मुश्किल नहीं है, बस तरीका अलग है। रील्स में पूरी जानकारी नहीं मिलती। मिलता है आइडिया। अगर कोई रील आपको सोचने पर मजबूर करे, तो समझिए सही दिशा में है। रील से सीख शुरू होती है। गहराई YouTube या ब्लॉग से आती है।

Twitter या X

यहां सोच बनती है। लंबे लेक्चर नहीं मिलेंगे। लेकिन छोटे वाक्य दिमाग खोल देते हैं। जो लोग यहां रोज लिखते हैं, अक्सर वही असली सीख देते हैं।

फ्री में सीखने का सही तरीका

अब असली बात पर आते हैं। सिर्फ देखना सीखना नहीं है। वीडियो देख लिया, रील देख ली और स्क्रॉल कर दिया। यह सीख नहीं है। यह सिर्फ मनोरंजन है। सीख तब होती है जब आप रुकते हैं। एक वीडियो देखा और खुद से पूछा मैं इससे क्या कर सकता हूं? अगर जवाब नहीं मिला, तो आगे मत बढ़िए। नोट्स बनाना जरूरी है कागज हो या मोबाइल जो सीखा, उसे लिखिए। लिखने से दिमाग साफ होता है। एक सिंपल तरीका है। हर दिन सिर्फ तीन बातें लिखो। जो आज नई सीखी। बस तीन। ज्यादा नहीं।

सही लोगों को फॉलो कैसे करें

यह सबसे अहम हिस्सा है। फॉलो करने से पहले ये देखिए क्या वह व्यक्ति खुद वही काम करता है। जो सिखा रहा है? क्या वह गलतियां भी बताता है या सिर्फ सक्सेस दिखाता है? जो लोग अपनी असफलता की बात करते हैं। वही अक्सर सच्ची सीख देते हैं। ज्यादा लोगों को फॉलो मत कीजिए। यह बहुत बड़ी गलती है। हर दिन नया गुरु, हर दिन नई सलाह और दिमाग पूरी तरह कन्फ्यूज बेहतर है। एक स्किल, दो या तीन लोग और उन्हीं से सीख

फ्री सीखने में सबसे बड़ा धोखा

अब यहां एक कड़वी सच्चाई है। कुछ लोग जानबूझकर अधूरी जानकारी देते हैं। ताकि आप उनका कोर्स खरीदें। यह गलत नहीं है। लेकिन आपको समझदार बनना होगा। अगर कोई हर वीडियो में कहता है। पूरी जानकारी कोर्स में है। तो समझिए वह बेचने आया है। अच्छा टीचर पहले देता है। फिर बेचता है।

प्रैक्टिस के बिना सीख बेकार है

यह लाइन याद रखिए। सीखने और करने में फर्क होता है। आप सौ वीडियो देख सकते हैं। लेकिन जब तक खुद कुछ नहीं करेंगे। कुछ नहीं बदलेगा। अगर कंटेंट राइटिंग सीख रहे हैं। तो रोज लिखिए। चाहे कोई पढ़े या नहीं। अगर वीडियो एडिटिंग सीख रहे हैं। तो मोबाइल से ही शुरू करिए। अगर डिजिटल मार्केटिंग सीख रहे हैं। तो अपनी ही प्रोफाइल पर प्रयोग करिए। गलतियां होंगी और वही असली टीचर हैं

✓ सोशल मीडिया आपको ये एहसास ही नहीं होने देता कि समय कैसे निकल गया। इसलिए एक नियम बनाइए। सीखने के लिए एक तय समय। मान लीजिए रोज एक घंटा उस एक घंटे में नोटिफिकेशन बंद सिर्फ सीख। बाकी समय मनोरंजन हो सकता है। लेकिन दोनों को मत मिलाइए

फ्री सीखते हुए पैसे कब लगेंगे

यह सवाल सबके दिमाग में आता है। सच ये है शुरुआत में पैसे की जरूरत नहीं होती। लेकिन एक समय आता है जब आपको दिशा चाहिए। स्पीड चाहिए तब कोर्स काम आते हैं लेकिन तब जब आप पहले से जानते हों कि आपको क्या चाहिए बिना समझ के लिया गया कोर्स सबसे बड़ा नुकसान है।

✓ सोशल मीडिया आपको सब कुछ नहीं सिखाएगा लेकिन यह रास्ता दिखा सकता है यह आपको लोगों से जोड़ सकता है, सोच बदल सकता है, हिम्मत दे सकता है आगे चलना आपको खुद है।

मेरी खुद की राय

अगर आप सच में सीखना चाहते हैं। तो बिना पैसे के भी मुमकिन है। लेकिन इसके लिए धैर्य चाहिए, अनुशासन चाहिए और खुद से ईमानदारी चाहिए। मै भी ऐसे ही किया था। जो लोग कहते हैं फ्री में कुछ नहीं मिलता वे अक्सर कोशिश ही नहीं करते। आप करें, धीरे करें लेकिन रोज करें यही फर्क पैदा करता है।


अगर यह लेख आपको काम का लगा। तो इसे सेव करिए और आज ही एक छोटा कदम उठाइए। सीख आज शुरू होती है। कल नहीं।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ