Ikigai Book Review खुश रहने की जापानी कला

खुश रहने की जापानी कला

Ikigai कोई भारी भरकम दर्शन नहीं है। न ही यह ऐसा ज्ञान है जिसे समझने के लिए आपको पहाड़ों में जाकर तपस्या करनी पड़े। यह किताब एक साधारण लेकिन गहरी बात करती है। ऐसी बात जो हम सब पहले से जानते हैं लेकिन कभी ठीक से उस पर रुककर सोचा नहीं। यह किताब पूछती है। आप सुबह उठते क्यों हैं। आपके दिन को मतलब क्या देता है। आपको जीते रहने की वजह क्या मिलती है। जापान में इसे Ikigai कहा जाता है। मतलब जीवन का कारण। जीने की वजह। यह रिव्यू किसी प्रोफेसर की तरह नहीं होगा। यह एक इंसान से दूसरे इंसान की बातचीत है। अगर आप खुश रहना चाहते हैं लेकिन अंदर से थोड़े थके हुए हैं तो यह लेख आपके लिए है।

Ikigai Book Review खुश रहने की जापानी कला

Ikigai है क्या, सच में

यहाँ सबसे पहले एक गलतफहमी दूर करते हैं। Ikigai कोई चार गोलों वाला पोस्टर नहीं है जो इंटरनेट पर घूमता रहता है। न ही यह सिर्फ passion, profession, पैसा और दुनिया को जोड़ने का खेल है। असल Ikigai इससे कहीं ज्यादा व्यक्तिगत है। Ikigai वह चीज है। जिसके लिए आप बिना मजबूरी के समय निकालते हैं। जिसे करते हुए आप थकते नहीं। जिससे आपको यह एहसास होता है कि आज का दिन बेकार नहीं गया। यह जरूरी नहीं कि आपका Ikigai आपकी नौकरी हो। कई लोगों का Ikigai बागवानी है। किसी का खाना बनाना। किसी का दूसरों की मदद करना। यह किताब इसी भ्रम को तोड़ती है कि खुश रहने के लिए बड़ा लक्ष्य होना जरूरी है।

जापान के बूढ़े लोग और लंबी उम्र का रहस्य

किताब का सबसे दिलचस्प हिस्सा जापान के ओकिनावा द्वीप से जुड़ा है। यहाँ दुनिया के सबसे ज्यादा सौ साल से ऊपर जीने वाले लोग रहते हैं। लेखक उनसे बात करते हैं। उनकी दिनचर्या देखते हैं। और एक बात साफ निकलकर आती है। ये लोग रिटायर नहीं होते। ये लोग खाली नहीं बैठते। ये लोग उपयोगी बने रहते हैं। कोई सुबह बच्चों को पढ़ाने जाता है। कोई सब्जियां उगाता है। कोई दोस्तों के साथ बैठकर बातें करता है। यहाँ एक बात समझने लायक है। खुशी सिर्फ आराम से नहीं आती। खुशी आती है अर्थ से। जब आपको लगता है कि आपकी जरूरत है। तब शरीर भी साथ देता है। मन भी साथ देता है।

छोटी खुशियों की ताकत

किताब बड़ी बातों से ज्यादा छोटी आदतों पर जोर देती है। जैसे:- धीरे खाना। पूरी नींद लेना। हर दिन थोड़ा चलना। हर दिन किसी से बात करना। यह सुनने में बहुत साधारण लगता है। लेकिन सच्चाई यही है कि हम इन्हीं बातों को नजरअंदाज करते हैं। यह किताब आपको याद दिलाती है कि खुशी कोई एक दिन का जश्न नहीं है। खुशी रोज की साधारण दिनचर्या में छिपी होती है। अगर आप हर दिन खुद से लड़ते रहते हैं। तो कोई भी सफलता आपको शांत नहीं कर पाएगी।

Flow क्या है और यह क्यों जरूरी है

Ikigai किताब में Flow नाम का एक विचार आता है। Flow वह अवस्था है जब आप किसी काम में इतने डूब जाते हैं कि समय का एहसास ही नहीं रहता। जैसे:- कोई लिखते हुए। कोई पेंटिंग करते हुए। कोई संगीत सुनते या बजाते हुए। उस समय आप न खुश होने की कोशिश करते हैं। न दुखी होने की। आप बस होते हैं। यह किताब कहती है। हर इंसान को अपने Flow moments ढूंढने चाहिए। यही moments धीरे धीरे Ikigai बन जाते हैं।

पैसा, काम और संतुलन

यह किताब यह नहीं कहती कि पैसा बेकार है। लेकिन यह जरूर कहती है कि पैसा ही सब कुछ नहीं है। अगर आप ऐसा काम कर रहे हैं। जो आपको अंदर से खोखला कर रहा है। तो ज्यादा सैलरी भी आपको बचा नहीं पाएगी। और अगर आप ऐसा काम कर रहे हैं। जिसमें आपको अर्थ दिखता है। तो कम पैसा भी आपको पूरी तरह तोड़ नहीं पाएगा। यहाँ एक कड़वी लेकिन सच्ची बात आती है। हर काम पसंदीदा नहीं हो सकता। लेकिन हर इंसान अपने काम के बाहर भी Ikigai खोज सकता है।

रिश्ते और समुदाय का रोल

Ikigai सिर्फ अकेले बैठकर नहीं मिलता। जापानी संस्कृति में समुदाय बहुत अहम है। दोस्त, परिवार, पड़ोसी हर दिन किसी से जुड़ना। किसी की सुनना। किसी के साथ हँसना। यह सब मानसिक सेहत को मजबूत करता है। यह किताब यह साफ कहती है। अकेलापन धीरे धीरे इंसान को अंदर से तोड़ देता है। भले ही वह बाहर से कितना सफल क्यों न दिखे

तनाव, उम्र और स्वीकार्यता

एक खूबसूरत विचार इस किताब में बार बार आता है। हर चीज पर नियंत्रण जरूरी नहीं। हम अक्सर हर बात को ठीक करना चाहते हैं हर दर्द को हटाना चाहते हैं हर डर को मिटाना चाहते हैं जापानी सोच थोड़ा अलग है।

वह कहती है कुछ चीजों को स्वीकार करो। कुछ को बहने दो। तनाव कम करने का यही तरीका है। जब आप उम्र को दुश्मन नहीं मानते। जब आप बदलाव से लड़ते नहीं। तब जीवन हल्का लगने लगता है

यह किताब किसके लिए है

यह किताब उनके लिए है जो बाहर से ठीक दिखते हैं लेकिन अंदर से थके हुए हैं यह उनके लिए है जो खुश रहना चाहते हैं लेकिन समझ नहीं पाते कैसे यह उनके लिए नहीं है जो जादुई समाधान ढूंढ रहे हैं या एक हफ्ते में जीवन बदलने की उम्मीद रखते हैं यह किताब धीमी है लेकिन ईमानदार है

इस किताब की सबसे बड़ी ताकत

सबसे अच्छी बात यह है कि यह किताब आपको कुछ बनने का दबाव नहीं देती। यह आपको बस यह याद दिलाती है कि आप पहले से काफी हैं। आपको सिर्फ अपने दिन को। अपने काम को। अपने रिश्तों को। थोड़ा ध्यान से देखने की जरूरत है Ikigai कोई मंजिल नहीं है यह एक दिशा है

मेरी ईमानदार राय

यह किताब आपको अचानक अमीर नहीं बनाएगी। यह आपको मशहूर नहीं बनाएगी। लेकिन यह आपको खुद के थोड़ा करीब जरूर ले आएगी। अगर आप इसे धैर्य से पढ़ते हैं और एक दो बातों को भी अपने जीवन में उतारते हैं तो फर्क महसूस होगा धीरे लेकिन स्थायी

आखिर में

खुश रहने का कोई एक तरीका नहीं होता। लेकिन खुश रहने की वजह जरूर होती है। Ikigai आपको वही वजह ढूंढने में मदद करती है। बिना शोर के। बिना दिखावे के। अगर आप जीवन को सिर्फ निकाल नहीं रहे। बल्कि जीना चाहते हैं। तो यह किताब आपके समय के लायक है।

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